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एन. रघुरामन का कॉलम:ग्रेट आइडिया के लिए खुला दिमाग चाहिए, लाखों डॉलर लैब की जरूरत नहीं
2017 में दुनिया जब सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या से जूझ रही थी और रेस्तरां इसके बेतुके से विकल्प तलाश रहे थे तो प्रोफेसर साजी वर्गीज क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के हरे-भरे कैंपस में रोज की तरह टहल रहे थे। उनकी नजर घास पर पड़े नारियल के एक
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